रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं
ये आंसुओ से तर हो सकते हैं
रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं
चंद सांसे अभी भी बाकी हैं
मेरे नुख्से कारगर हो सकते हैं
हमें अब तक यकीं नहीं आया
वो भी सितमगर हो सकते हैं
ये वक़्त का एक फलसफा है
फूल भी पत्थर हो सकते हैं
नुकसान की तो बात न करो
ये जनाब जानवर हो सकते हैं
दरख्त सूखने लगे अचानक
कई परिंदे बेघर हो सकते हैं
इस तरह मुलाक़ात की उसने
ये चर्चे उम्र भर हो सकते हैं
अपने घर में कभी न सोचा
हम भी बेक़दर हो सकते हैं
बात यकीं पे आके रुकती है
सायेबां सूखे शजर हो सकते हैं
कैफ़ियत यूँ ठीक नहीं अपनी
तीर-ए-नज़र बेअसर हो सकते हैं


5 Comments:
हमें अब तक यकीं नहीं आया
वो भी सितमगर हो सकते हैं
bahut hi shaandar gazal kahi hai alok ji, aapko kafi samay se padhti aa rahi hun.
koi jariya nahi mila to yahan pe aapko batana chahungi ki ek bahut khoobsurat community basai hai hum kuch doston ne mil ke. agar aap orkut pe hain, to please visit n join
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Regards
Deep
हमें अब तक यकीं नहीं आया
वो भी सितमगर हो सकते हैं
ये वक़्त का एक फलसफा है
फूल भी पत्थर हो सकते हैं
नुकसान की तो बात न करो
ये जनाब जानवर हो सकते हैं
दरख्त सूखने लगे अचानक
कई परिंदे बेघर हो सकते हैं
bahut sunder rachna likihi aHAI .. BADHAAI..... Surinder
चंद सांसे अभी भी बाकी हैं
मेरे नुख्से कारगर हो सकते हैं
यकीनन, महज हौसला चाहिये
खूबसूरत रचना
"ये आंसुओ से तर हो सकते हैं
रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं"
आंसुओ से तर हो कर रिश्ते और बेहतर हो ही जाते है ……..लेकिन शायद हर बार नहीं ………
“विदेह” पर आपके स्नेहिल प्रोत्साहन के लिये आभार !
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