Monday, September 7, 2009

रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं

ये आंसुओ से तर हो सकते हैं
रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं

चंद सांसे अभी भी बाकी हैं
मेरे नुख्से कारगर हो सकते हैं

हमें अब तक यकीं नहीं आया
वो भी सितमगर हो सकते हैं

ये वक़्त का एक फलसफा है
फूल भी पत्थर हो सकते हैं

नुकसान की तो बात न करो
ये जनाब जानवर हो सकते हैं

दरख्त सूखने लगे अचानक
कई परिंदे बेघर हो सकते हैं

इस तरह मुलाक़ात की उसने
ये चर्चे उम्र भर हो सकते हैं

अपने घर में कभी न सोचा
हम भी बेक़दर हो सकते हैं

बात यकीं पे आके रुकती है
सायेबां सूखे शजर हो सकते हैं

कैफ़ियत यूँ ठीक नहीं अपनी
तीर-ए-नज़र बेअसर हो सकते हैं

5 Comments:

At October 7, 2009 at 11:14 AM , Blogger दिपाली "आब" said...

हमें अब तक यकीं नहीं आया
वो भी सितमगर हो सकते हैं

bahut hi shaandar gazal kahi hai alok ji, aapko kafi samay se padhti aa rahi hun.
koi jariya nahi mila to yahan pe aapko batana chahungi ki ek bahut khoobsurat community basai hai hum kuch doston ne mil ke. agar aap orkut pe hain, to please visit n join
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Regards
Deep

 
At October 14, 2009 at 5:45 AM , Blogger SURINDER RATTI said...

हमें अब तक यकीं नहीं आया
वो भी सितमगर हो सकते हैं

ये वक़्त का एक फलसफा है
फूल भी पत्थर हो सकते हैं

नुकसान की तो बात न करो
ये जनाब जानवर हो सकते हैं

दरख्त सूखने लगे अचानक
कई परिंदे बेघर हो सकते हैं
bahut sunder rachna likihi aHAI .. BADHAAI..... Surinder

 
At December 16, 2009 at 8:48 AM , Blogger M VERMA said...

चंद सांसे अभी भी बाकी हैं
मेरे नुख्से कारगर हो सकते हैं
यकीनन, महज हौसला चाहिये
खूबसूरत रचना

 
At December 20, 2009 at 12:31 PM , Blogger अभिषेक आर्जव said...

"ये आंसुओ से तर हो सकते हैं
रिश्ते और बेहतर हो सकते हैं"


आंसुओ से तर हो कर रिश्ते और बेहतर हो ही जाते है ……..लेकिन शायद हर बार नहीं ………

 
At December 20, 2009 at 12:33 PM , Blogger अभिषेक आर्जव said...

“विदेह” पर आपके स्नेहिल प्रोत्साहन के लिये आभार !

 

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