Tuesday, March 11, 2014

सदियों तक ग़ुलामी झेलता इस देश का अदना सा बेचारा इंसान। राजशाही व्यवस्था में राजा सरकार था और उसके मंत्री -सामंत आम लोगों के माई बाप। कुछ बुद्धजीवी लोग , बहादुर लोग लड़े और इस व्यवस्था परिवर्तन में अपना विश्वास जताते हुए योगदान दिया तमाम संघर्षो के बाद २६ नवंबर १९४९ को हमें, हमारे लिए ,हमारे तरीके से जीने की व्यवस्था मिली जिसका स्वरुप था लोक तन्त्र। इस देश के अदना से बेचारे इंसान को ये मालूम हुआ कि देश आज़ाद हुआ है पर अफ़सोस उसे ये सन्देश नहीं मिला कि वो भी आज़ाद हुआ है क्योंकि ये सन्देश लिखित रूप में था और किताबों में ज़ब्त(भारतीय संविधान) और उस बेचारे इंसान की साक्षरता दर लगभग 18.33%(in 1951) थी। कहाँ पढ़ पाता अपने अधिकार और कहाँ निभा पाता अपने लिखित कर्त्तव्य।
देश आज़ाद हुआ वो अदना सा, अनपढ़, गरीब, बेचारा इंसान नहीं। । हाँ बस माई-बाप बदल गए.

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