हैरत की बात है
हैरत की बात ये भी है कुछ लोग पुरुषार्थ से परे अपने घर की महिलाओं को रेलवे टिकेट की खिड़की पे भेज देते हैं ताकि जल्दी से टिकेट मिल जाए । भले उनकी रेल गाड़ी १-२ घंटे बाद भी रवाना क्यों न होने वाली हो । उस वक़्त वक़्त उनके चहरे पे शर्मिंदगी और उपलब्धि दोनों का मिला जुला परन्तु अद्भुत भाव होता है । इधर हम लाइन में खड़े सोचते हैं कि"जाएँ चपलिया दें क्या ???"


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