Friday, August 26, 2016

वो समझना क्यों नहीं चाहते ?

ज्ञानी और समझदार होना , दोनों दो अलग अलग बातें हैं । समझदारी अनुभवों से निर्मित एक अवस्था है जिसमें उन्माद या आवेग कतिपय ही रहता है । ज्ञानी लोग इस बात को समझना क्यों नहीं चाहते ? क्योंकि "ज्ञानी और समझदार होना , दोनों दो अलग अलग बातें हैं ।"

हैरत की बात ये भी है

पलायन वेग के अच्छे जानकार भी कभी कभी आसमाँ में ठीक ऊपर की ओर थूक देते हैं !! जाने क्यों ??

हैरत की बात है

हैरत की बात ये भी है कुछ लोग पुरुषार्थ से परे अपने घर की महिलाओं को रेलवे टिकेट की खिड़की पे भेज देते हैं ताकि जल्दी से टिकेट मिल जाए । भले उनकी रेल गाड़ी १-२ घंटे बाद भी रवाना क्यों न होने वाली हो । उस वक़्त वक़्त उनके चहरे पे शर्मिंदगी और उपलब्धि दोनों का मिला जुला परन्तु अद्भुत भाव होता है । इधर हम लाइन में खड़े सोचते हैं कि"जाएँ चपलिया दें क्या ???"