वो समझना क्यों नहीं चाहते ?
ज्ञानी और समझदार होना , दोनों दो अलग अलग बातें हैं । समझदारी अनुभवों से निर्मित एक अवस्था है जिसमें उन्माद या आवेग कतिपय ही रहता है । ज्ञानी लोग इस बात को समझना क्यों नहीं चाहते ? क्योंकि "ज्ञानी और समझदार होना , दोनों दो अलग अलग बातें हैं ।"

